तेरी आँखों में कई राज़ है ,
तेरी बातें कुछ ख़ास है ।
तू है भी या है ही नहीं ?
पर तेरे अंदाज़-ए-बया बेहिसाब है ।
अब इससे आगे और क्या कहू मै ,
क्यूंकि मेरे लिए तो तू मेरा विश्वास है ।
तेरी हर अदा जुदा सी है ,
तो फिर क्यूँ तू खफा सी है ।
तू कुछ कहे या न कहे ,
पर वो दो आँखें तेरी जुंबा सी है ।
मेरे दिल की अब बस यही हसरत है ,
तू हो सदा साथ तो मेरी किस्मत है ,
तू हस्ती रहे मुस्कुराती रहे,
क्यूंकि अब तो बस वही मेरी जन्नत है, वही मेरी जन्नत है ।
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