Wednesday, December 25, 2013

कुछ ख़ास ...

तेरी आँखों  में  कई  राज़  है ,
तेरी  बातें  कुछ  ख़ास  है ।
तू  है  भी  या  है  ही  नहीं ?
पर  तेरे  अंदाज़-ए-बया बेहिसाब  है ।
अब  इससे  आगे  और  क्या  कहू  मै ,
क्यूंकि  मेरे  लिए  तो  तू  मेरा  विश्वास  है ।

तेरी हर अदा  जुदा  सी  है ,
तो  फिर  क्यूँ  तू  खफा  सी  है ।
तू  कुछ  कहे  या  न  कहे ,
पर  वो  दो  आँखें  तेरी  जुंबा  सी  है ।

मेरे दिल की अब बस यही हसरत है ,
तू हो सदा साथ तो मेरी किस्मत है ,
तू हस्ती रहे मुस्कुराती रहे,
क्यूंकि अब तो बस वही मेरी जन्नत है, वही मेरी जन्नत है ।

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