Friday, May 25, 2012

बस यूँ ही ....संग्रहालय


Has been some time to the last update..Was sitting free in office, wow...this happens so very rarely kaash....,  listening to songs when these line made me write this post.

Thought why not share some beautiful lines, songs, shayree & everything about music, sangeet, kavitaayein, panktiyain, gadhya-padhya n the list can go on & on & on...

So, here is the first one.

बस... एक हाँ के इंतज़ार में ,
रात यू ही गुज़र जाएगी....
अब तो बस उलझन है साथ मेरे,
नीद कहाँ आयगी ...
सुबह की किरण जाने,
कौन सा सन्देश लाएगी...
रिमझिम सी गुनगुनायगी.....या प्यास अधूरी रह जायगी

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Another one, courtesy a friend. Short & Sweet, sometimes words speak louder than action.

उदास तुझे देखने से पहले ये आँखें न रहें ..
खफा हो तु मुझसे तो ये साँसे न रहें ..
अगर गम ही दू तुझे,
तो तेरी ज़िन्दगी में हम क्या हमारी यादें भी न रहें ।
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उसकी  हर  अदा  जुदा  सी  लगती  है ,
हर  बात  पर  वो  खफा  सी  लगती  है ,
मेरे  टूटे  हुए  दिल  पर  वो  शान  से  हँसती  है ,
पर  अब  तो  वो  हर  अंदाज़  से  बेवफा  सी  लगती  है ।
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मेरी  ज़िन्दगी  के  राज़  मैं  एक  राज़  तुम  भी  हो ,
मेरी  बंदगी  की  प्यास  मैं  एक  प्यास  तुम  भी  हो, 
तुम  क्या  हो  कुछ  तो  हो  या  कुछ  नहीं  मगर ,
मेरी  ज़िन्दगी  के  काश  मैं  एक  काश  तुम  भी  हो  ।

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दर्द की  महफ़िल  में  एक  शेर  हम  भी  अर्ज़  किया  करते  है,
न  किसी  से  मरहम  न  दुआओं  की  उम्मीद  किया  करते  है |
कई  चेहरे  लेकर  लोग  यहाँ  जिया  करते  है,
हम  इन  आसुंओं  को  एक  चेहरे  के  लिए  पीया  करते  है |

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मैकदे  बंद  करे   लाख  ज़मानेवाले ,
शहर  में  कम  नहीं  आँखों  से  पिलानेवाले ।
काश  मुझको  लगाले  तू  कभी  सीने  से,
मेरी  तसवीर  को  सीने  से  लगानेवाले ।
हम  यकीन  आपके  वादेपे  भला  कैसे  करें,  
आप  हरगिज़  नहीं  वादा  निभानेवाले ।
अपने  ऐबों  पे  नज़र  जिनकी  नहीं  होती  हैं ,
आइना  उनको  दिखाते  हैं  ज़मानेवाले ।

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रूठ  जाते  हो  तो  कुछ  और  हसीं  लगते  हो ....
अरे हम  ने  ये  सोच  के  ही  तुम  को  खफा  रखा  है ।

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जी  नहीं  सकता  तो  जीने  की  तमन्ना  छोड़  दे ।
बहते  बहते  जो  टेहर  जाए  वो  दरिया  छोड़  दे ।
फूल  था  मैं मुझको  एक  काँटा  बना  के  रख  दिया ,
और  अब  कांटे  से  कहते  हो  की  चुभना  छोड़  दे ।

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पूरी  धरा  भी  साथ  दे  तो  और  बात  है ,
पर  तू  जरा  भी  साथ  दे  तो  और  बात  है ।
चलने  को  तो  एक  पाँव  पर  भी  चल  रहे  हैं  लोग ,
दूसरा  भी  साथ  दे  तो  और  बात  है ।   
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आज खुदा ने फिर पूछा
तेरा हसता चेहरा उदास क्यूँ है !
तेरी आँखों में प्यास क्यूँ है
जिस के पास तेरे लिए वक्त नही
वही तेरे लिए ख़ास क्यूँ है....

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कुछ तो मजबूरिया रही होंगी ,
यूँ ही कोई बेवफा नहीं होता |
आपना  दिल  भी  टटोल   कर  देखो ,
फासला  बेवजह  नहीं  होता ।
जी  बहुत  चाहता  है  सच  बोले ,
क्या  करें  हौसला नहीं  होता ।।



Will try to share more, let it be a place (post) where I and you can share everything we love about music i.e. LIFE!!


Tuesday, May 15, 2012

कोशिश, प्रयास, प्रयत्न.......



बहुत सोचा, बहुत विचार  किया, दिमागी दौड़ करवा के देख ली... पर ऐसा लगता है की शायदइस कविता को या यू कहूं कि मेरे प्रयास के लिये इससे अच्छा शीर्षक फिलहाल मुझे सूझ नही रहा है| सच कहूं तो लिखने की कोशिश तो एक लम्बे  समय से हो रही है... दिन महीने बन गए और महीने साल पर पन्ने फटते गये, पंक्तिया मिटती गयी और अपनी कोशिश रही बेमिसाल|बेमिसाल इसलिए क्यूंकि इतने कुछ के बाद भी जब देखता तो समझ आता की नतीजा तो वो ही है सिफ़र | तब ऐसा भी लगने लगा की शायद लिखना मेरे लिए उतना ही कठिन है जितना सरल की गाना।

In short n sweet, बहुत  कोशिश के  बाद  भी  कुछ  ख़ास  नहीं  लिख  पा  रहा था,  पर  जैसा  कहते है की शायद समय, परिस्तिथि और उम्र आपको सब सिखा देती है । After all experience counts n yes even came to know that without any source of inspiration it’s really difficult to write something. इस बार कोशिश की है पढिये और अपनी  प्रतिक्रिया भी ज़रूर दीजिये |


जितना सोचा उतना अंसा नहीं था ये, कुछ जाना बड़ा अनजाना सा ये


कुछ खोया बहुत पाया सा ये, कुछ लम्हों में जीवन बिताया सा ये ।


हर सुबह होगा तेरी मुस्कुराहट का दीदार, यह सोच के रात का हर पल बिताया सा ये ।


उन जुल्फों का तेरे गालों पे आना, फिर उन नाज़ुक उंगलिओं से तेरा उन्हें हटाना


उस एक पल में जैसे सारा संसार भुलाया सा ये ।


कुछ खोया कुछ पाया सा ये, उन लम्हों में जीवन बिताया सा ये ।


कसमे हो तो तोड़ भी दूं , तूफाँ हो तो मोड़ भी दूं


चाहत हो तो छोड़ भी दूं , पर इस आदत के आगे अब मै क्या करूँ ??


बहुत खुद तो समझाया, मनाया, बुझाया सा ये ।


कुछ खोया कुछ पाया सा ये, उन लम्हों में सारा जीवन पाया सा ये ।